सुजीत कुमार
चाईबासा : भारत के राष्ट्रपती द्रौपदी मुर्मू के निजी आवास ( रायरंगपुर, ओड़िशा ) से पचास किलोमीटर की परिधी मे एक खुंखार हाथी इन दिनों विचरण कर रहा है l यह बिगडैल हाथी ओड़िशा से सटे झारखण्ड के सीमावर्ती क्षेत्र मे पिछले एक सप्ताह से विचारण कर रहा है l इस हाथी के हमले से अब तक 20 से अधिक लोगों की जाने जा चुकी हैं l
यह इलाका झारखण्ड के पश्चिमी सिंगभूम जिले के माझगांव विधानसभा के खडपोस पंचायत मे पड़ता है l साथ ही यह इलाका ओड़िशा का सीमा वर्ती क्षेत्र हैँ, जहां विगत 9 जनवरी को दंतेल हाथी ने तीन लोगों को कुचलकर मौत की नींद सुला दिया था l मृतकों में एक बच्चा, एक जेसीबी ऑपरेटर तथा एक बनकर्मी शामिल है l इनमे से जसीबी ऑपरेटर प्रकाश दास के परिजनों का रो रोकर बुरा हाल हो गया है l मृतक की माँ ने बताया कि प्रकाश 9 जनवरी को सुबह शौच करने निकला था, इसी बीच वहां घूम रहे जंगली हाथी ने उसे अपने चपेट मे ले लिया ओर उसे कुचलते हुए उसके सर को धड से अलग कर दिया l मृतक अपने परिवार में अकेला कमाने वाला था और पूरा परिवार उसी के ऊपर निर्भर था l उसकी एक बेटी की शादी हो चुकी है, जबकी दूसरी लड़की की शादी अगले माह होने वाली थी l इधर मुआवजा के नाम पर वन विभाग द्वारा 20 हजार रुपयों की सहायता राशि प्रदान की गयी है,और आगे 4 लाख रु और वन विभाग की ओर से देने का आश्वासन दिया गया है l क्षेत्र के लोग हाथी के तांडव के आगे विवश हैँ, और हाथी से बचाव के लिए सरकार से टार्च और पक्का मकान की मांग कर रहे हैँ l
मृतक के परिजन
इधर हाथी को भगाने के लिए बन विभाग की टीमें लगी हुई है, इनमे से एक टीम बंगाल से आई हुई थी, जिसमे टीम के एक सदस्य को जंगली हाथी ने अपने चपेट मे लिया, घायल अवस्था मे उसे इलाज के लिए क्योंझर ले जाया गया पर उसकी जान नहीं बचाई जा सकी l इसके बाद से हाथी भगाने के लिए पश्चिम बंगाल से आई वनतारा टीम लौट गई l
बिगडैल हाथी की ड्रोन विडियो
वर्तमान मे अलग अलग जिलों से आयी टीमो ने क्षेत्र मे केम्प किया हुआ है l ये टीम जो थर्मल ड्रोन के सहारे पागल हाथी को ट्रेक कर उसे खदड़ने मे लगा हुआ है l इस संबंध मे चाईबासा वन प्रमंडल के रेंजर जितेंद्र कुमार सिंह ने बताया की यह हाथी झुण्ड से भटक गया है,अब तक 13 लोगों की जान ले चूका है,और उसे ओड़िशा की और खदेड दिया गया है l
इधर हाथी के आतंक से आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों में भय का माहौल है ! लोग रात में जाग कर सतर्कता बारात रहे हैं l साथ ही कई लोग मुखिया के पक्के मकान में शरण ले रहे हैं,क्योंकि इस क्षेत्र के अधिकांश माकन मिटटी के बने हुए हैं !









