- चाईबासा – चाईबासा मे DMFT फंड की योजनाओं को हासिल करने के लिए ऑनलाइन टेंडर के माध्यम से जिले के बाहर के संवेदक भी अब कुद गए हैँ,इससे स्थानीय ठेकेदारों की एकाधिकार के ऊपर संकट के बादल गहराने लगे है,योजनाओं को हासिल करने की होड़ के कारण कम लागत मे अब कार्य पूर्ण करने का शिलशीला शुरू हो गया है,ऐसा होने से सरकार को तो फायदा हो ही रहा है,लेकिन साथ मे बाहरी ठेकेदारों के द्वारा स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी ठेंगा दिखाना का प्रचलन शुरू हो गया है !
मामला पश्चिमी सिंहभुम जिले के टोंटो प्रखंड अंतर्गत रेंगडासाई पंचायत क्षेत्र के ग्राम पालिसाई टोला के बुरु पेरतोल बाबूरु मुख्य सड़क से पेरतोल व रेंगडाहातु कातीगुटू से रुपदीरी बुरुईकुटी तक PCC पथ निर्माण कार्य से जुडा हुआ है,जिसकी कुल प्राकलित राशि 2 करोड़ 23 लाख रु है !

जिला परिषद सदस्य ने विभाग व ठेकेदार पर लगाया गंभीर आरोप
इस संबंध मे टोंटों प्रखंड क्षेत्र के जिला परिषद सदस्य राज तुबीड ने कार्यकारी एजेंसी NREP के ऊपर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि,विभाग की मिलीभगत से ठेकेदार मनमानी पर उतर आया है,उन्होंने कहा कि यह काम पलामु जिले के किसी गुप्ता इंटरप्राईजेज नामक संवेदक को लगभग 7 प्रतिशत कम दर पर आवंटित हुआ है, तथा योजना स्थल मे फर्जी शिलापट्ट स्थापित कर दिया गया है, जो की काफी घटिया स्तर का है,जबकी योजना की लागत राशि 2 करोड़ रु से अधिक है,बावजूद इसके मारवल शिलापट्ट के बजाय कागज पम्पलेट्स से बने एक बेहद ही घटिया स्तर का शिलापट्ट लगा दिया गया है,जिला परिषद सदस्य ने साफ कहा कि शिलापट्ट मे मंत्री दिपक बिरुवा एवं सांसद श्रीमती जोबा मांझी के हाथों से विगत 7 जनवरी को शिलान्यास होने की जानकारी दी गई है,राज तुबीड ने आगे कहा कि उक्त तिथि को सांसद जोबा मांझी एवं मंत्री दिपक बिरवा उपस्थित नहीं थे,ठेकेदार के द्वारा विभाग के साथ सांठ-गांठ कर आनन -फानन मे यह कृत्य किया गया है,और ऐसा करना स्थानीय जनप्रतिनिधियों की घोर अनदेखी करने के समान है,जिसे कतई बर्दास्त नहीं किया जायेगा !



योजना स्थल का यह इलाका चारों ओर जंगल से घिरा हुआ है,जो कि चाईबासा वन प्रमंडल परिक्षेत्र मे पड़ता है, वावजूद इसके,इस योजना को प्रारंभ करने से पूर्व वन विभाग की बिना अनुमति के ही ऊँचे-ऊँचे जंगली पेड़ों को JCB मशीन के सहारे उखाड़ने का सिलसिला शुरू हो गया है एवं साथ मे इस कार्य को पूर्ण करने के लिए कार्य स्थल मे पहाड़ी पत्थरों को भी इकट्ठा किया जाने लगा है !










