आज मुसाबनी प्रखंड के बड़ाघाट गांव में संथाली भाषा के लिपि विकासक गुरु गोमके पंडित रघुनाथ मुर्मू जी का जन्म जयंती मनाया गया । इस अवसर पर डॉ सुनीता ने पं रघुनाथ मुर्मू जी के फोटो पर माल्यार्पण करते हुए पुष्प अर्पित किए तथा डॉ सुनीता ने संबोधन करते हुए कहा कि पंडित रघुनाथ मुर्मू हमारे भाषा एव्ं लिपि के बहुत बड़े मार्गदर्शक हैं। हमें उनके बताए गए हुए रास्ते पर चलना चाहिए । हमें अपने समाज को बेहतर शिक्षा के उपर ध्यान देना चाहिए । ताकि हमारे समाज का एक भी बच्चा शिक्षा से वंचित ना रहें।
पंडित रघुनाथ मुरमू संताली भाषा का लिपि ओल चिकी का आविष्कारक थे । जिन्होंने बहुत संघर्ष करके इस लिपि का शुभारंभ किया था l पंडित रघुनाथ मुरमू का परिचय एक नाटकार, विचारक , लेखक के रूप मे जाना जाता है। उन्होंने संताली भाषा का उपयोग करते हुए 150 से अधिक पुस्तकें लिखीं। जैसे कि व्याकरण, उपन्यास, नाटक, कविता और संताली में विषयों की एक विस्तृत श्रेणी को कवर किया, जिसमें संताली समाज को सांस्कृतिक रूप से उन्नयन के लिए अपने व्यापक कार्यक्रम के एक हिस्से के रूप में ओल चिकी का उपयोग किया गया। “दाड़े गे धोन”, “सिद्धु-कान्हू”, “बिदु चंदन” और “खेरवाड़ बीर” उनके कामों में से सबसे प्रशंसित हैं।
जब रघुनाथ मुर्मू ने ‘ओलचिकी लिपि’ का विकास किया और उसी में अपने नाटकों की रचना की, तब से आज तक वे एक बड़े सांस्कृतिक नेता और संताली के सामाजिक-सांस्कृतिक एकता के प्रतीक रहे हैं।
इस मौके पर अबूसेल के संजय मुर्मू ,गांव के नाईके बाबा राघव मुर्मू ,शिक्षिका माइनों सोरेन ,वार्ड सदस्य रीमा मुर्मू ,नाइके आयो छिता मुर्मू , साईमन मुर्मू ,संतोष टुडू , शेखर टुडू ,मंगल सोरेन, किसुन सोरेन,चुड़ामनी आदि शामिल थेl










