शिवसेना का नाम और सिम्बल का विवाद को विराम देते हुए चुनाव आयोग ने शिंदे गुट को असली शिवसेना मानते हुए पार्टी का नाम और सिंबल इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी है। आयोग ने कहा कि शिवसेना का मौजूदा संविधान अलोकतांत्रिक है। उद्धव गुट ने चुनाव कराए बिना अपने लोगों को पदाधिकारी बनाया। इधर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने चुनाव आयोग के फैसले को लोकतंत्र की जीत बताया।

वहीं, उद्धव ठाकरे ने कहा कि चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट से पहले फैसला नहीं देना चाहिए। पार्टी के नैतिक मूल्यों को दरकिनार कर अगर विधायकों और सांसदों की संख्या के आधार पर पार्टी का अस्तित्व तय किया जाता है, तो कोई भी पूंजीपति विधायक और सांसद खरीदकर मुख्यमंत्री या मंत्री बन सकता है। उद्धव ने चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की बात भी कही।










