कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय धालभूमगढ़ में छठी कक्षा में नामांकन के लिए 26 में से 25 सीटें सबर जनजाति के बच्चों के लिए रिजर्व कर दिया गया है l जिसके बाद अनुसूचित जनजाति वर्ग से आने वाले बच्चों को अपना नामांकन नहीं होने का दर सताने लगा है l क्योंकि आरक्षण के बाद इनलोगों के लिए मात्र एक ही सीट बचता है l ऐसे में प्रशन यह उठ खड़ा हुआ है की बाकी अनुसूचित जनजाति की बालिकाओं का क्या होगा ? इस कारण अपने बच्चियों के दाखिले के लिए फ़ार्म भरने गए अभिभावकों ने विद्यालय की इस पालिसी के खिलाफ अपना विरोध जताया l
अभिवावाको को विद्यालय प्रबंधन की ओर से इस बारे में यह बताया जा रहा है की पूर्वी सिंहभूम जिले की उपायुक्त का आदेश है की सबर जनजाति के बालिकाओं का प्रवेश प्राथमिकता के आधार पर लेना है l
इसपर बालिकाओं के अभिवावाको का कहना है की यदि ऐसी बात है तो या तो कोटा में फिफ्टी – फिफ्टी का फार्मूला लागू किया जाये या फिर अनुसूचित जनजाति के लोगों के लिए दाखिला का कोटा बढाया जाये l वरना बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाएंगे l वहीँ विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एवं सदस्यों ने कहा कि यह आदिवासी बहुल प्रखंड है ऐसी स्थिति में आदिवासी छात्राओं का हर हाल में आवासीय विद्यालय में नामांकन होना चाहिए. उपायुक्त का आदेश समझ से परे हैं.
अभिवावाको ने कहा की यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया जायगा तो इस मुद्दे को राज्य के मुख्यमंत्री , और शिक्षा मंत्री तक लेकर जाएंगे l क्योंकि बच्चों के भविष्य का सवाल है l
इस मौके पर स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष वैजनाथ सोरेन, सदस्य इंद्रजीत मुर्मू, श्यामल मार्डी, शरबत मुर्मू, अभिभावक रुपाई मुर्मू, विक्रम सोरेन, नीलमणि बेसरा, बनासी सोरेन, शांति महतो, पिंकी दत्ता आदि उपस्थित थे.










