चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले के घोर नक्सल प्रभावित सारंडा क्षेत्र में नक्सलियों के विरोध कार्रवाई के तहत सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। 22 जनवरी की सुबह बहदा–कुमडीह गांव के बीच जंगल में हुई भीषण मुठभेड़ में एक करोड़ रुपये का इनामी कुख्यात नक्सली पातीराम मांझी उर्फ अनल दा मारा गया। मुठभेड़ स्थल से उसका शव बरामद कर लिया गया है,जिससे उसकी मौत की आधिकारिक पुष्टि हो गई है।
मुठभेड़ मे मारे गए नक्सलियों का शव
नक्सली संगठन का टॉप कमांडर था अनल दा
सूत्रों के अनुसार, अनल दा नक्सली संगठन का शीर्ष नेता और अनुभवी रणनीतिकार था। वह मूल रूप से झारखंड के गिरिडीह जिले का निवासी था और बीते दो दशकों से नक्सली गतिविधियों में सक्रिय था। संगठन में उसकी पकड़ मजबूत मानी जाती थी और वह कई बड़े नक्सली अभियानों की योजना में शामिल रहा।
कई जिलों में सुरक्षावालों पर हमलों में रही है भूमिका
अनल दा की गतिविधियां केवल एक जिले तक सीमित नहीं थीं। गिरिडीह, बोकारो, हजारीबाग, सरायकेला-खरसावां और पश्चिमी सिंहभूम सहित कई जिलों में सुरक्षाबलों पर हुए हमलों में उसकी संलिप्तता सामने आई थी। उस पर आईडी विस्फोट, सुरक्षाबलों पर हमले, लेवी वसूली और विकास कार्यों में बाधा डालने जैसे दर्जनों संगीन मामले राज्य के विभिन्न थानों मे दर्ज हैँ ।
नक्सली अनलदा के ऊपर एक करोड़ का था ईंनाम
अनल दा की गिरफ्तारी या मुठभेड़ में मारे जाने को लेकर झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने उस पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। लंबे समय से सुरक्षाबल उसकी तलाश में थे।
पुख्ता सूचना पर चला सर्च ऑपरेशन
22 जनवरी की सुबह सुरक्षाबलों की संयुक्त टीम को सारंडा जंगल में नक्सलियों की मौजूदगी की पुख्ता सूचना मिली थी। इसी आधार पर इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया गया। ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी, जिसके जवाब में हुई मुठभेड़ में अनल दा मारा गया।
नक्सली नेटवर्क को लगा बड़ा झटका
सुरक्षा एजेंसियां इसे नक्सल विरोधी अभियान में अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मान रही हैं। अनल दा के मारे जाने से सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में नक्सली नेटवर्क को गहरा झटका लगना तय माना जा रहा है। फिलहाल इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है और सुरक्षा बल सतर्कता बरत रहे हैं।