Chaibasa:- विगत 1 मार्च 2023 की सुबह छह बजे अरहर खेत देखने जा रहे गोइलकेरा थाना इलाके के ईचाहातु के कृष्णा पूर्ति के शरीर के चिथड़े तक उड़ गए, जब उसका पैर नक्सलियों द्वारा बिछाए गए प्रेशर बम पर पड़ गया था। साथ में उसकी पत्नी नंदी कुई भी थी । कृष्णा के दोनों पैर उड़ गए थे। वहीं पत्नी लहुलूहान थीं। बम की आवाज सुनकर 18 साल का बेटा मधुसूदन खेतों की ओर दौड़ा तो देखा उसके पिता के पैर उड़ चुके हैं व मां तड़प रही है। घर तक पिता के शरीर को लाया, लेकिन तब तक वह मरे चुके थे। ये नक्सली हिंसा थी पूरी कहानी अब शुरू होती है। लाल आतंक का असर ही है। जिससे कई परिवारों को इन दिनों कोल्हान के जंगल में दोहरी मार झेलना पड रहा हैं। कृष्णा पूर्ति का पुलिस ने पोस्टमार्टम करा दिया। डेड बॉडी भी घर के आंगन में दफना दी गई। मां नंदी के घाव भी ठीक हो गए, लेकिन आंखें खराब हो गई हैं जिसके चलते वह देख नहीं पा रही है!

कृष्णा के 5 बच्चे: सबसे बड़े 18 साल के बेटे पर परिवार का जिम्मा
कृष्णा के पांच बच्चे हैं। सबसे बड़ा बेटा 18 साल का मधुसूदन है। वह आठवीं तक पढ़ा है। अब उसके माथे पर पूरे परिवार का जिम्मा है। घटना के 1 महीने 25 दिन बीत चुके हैं। अब हालात पर थोड़ा गौर करें। पूरे परिवार को सरकारी अनाज कृष्णा पूर्ति के आधार कार्ड से जुड़े राशन कार्ड से मिल रहा था। इधर नक्सली हिंसा में मारे गए परिवार को सरकारी मुआवाजा 1 से 3 लाख मिलता है, और एक सरकारी नौकरी। लेकिन परिवार के 18 साल के बड़े बेटे का आधार कार्ड भी नहीं है।
घटना को लेकर मृतक के बेटे ने बताई आपबीती:-आज भी कानों में गूंजती है बम की आवाज, नहीं मिला कोई भी सरकारी मदत
सुबह को मां बाबू जी ईचागोड़ा के रास्ते पर अरहर खेत देखने जा रहे थे। ठीक खेत के पास ही बम धमाका हुआ। जिसमें मां घायल हुई और मेरे पिता के दोनों पैर उड़ गए। घर लाने पर मर गए। खेत में ही अरहर पड़े रहे, हमलोंग और लाने तक नहीं गए। बम की आवाज से अब भी डर लगता है। छोटे भाई बहन जब घर से बाहर रहते हैं तो बम का डर लगा रहता है। मां की आंखें खहो गई हैं। मेरे घर में अनाज तक नहीं है। सीओ बीडीओ से कोई मदद नहीं मिली है। मेरा आधार कार्ड भी नहीं बन पा रहा है। मधुसूदन पूर्ति, मृतक का पुत्र!
ये है मुआवजा एवं सरकारी नौकरी मिलने का प्रावधान
नक्सली हिंसा पीड़ित को मिलता है,नौकरी नक्सली हिंसा में मारे जाने पर पीड़ित परिवार को सरकारी मुवाआजा एक से 3 लाख रु देने का प्रावधान है। इसके अलावे पीड़ित परिवार को एक सरकारी नौकरी मिलती है। इसे लेकर केंद्र व राज्य सरकार के द्वारा सारी औपचारिकताऐं पूरी की जाती है । लेकिन इससे जिले के उपायुक्त को अनुशंसा करना पड़ता है!

पीड़ित परिवार को लेकर जिले के एसपी आशुतोष शेखर का बयान
जिले के पुलिस अधीक्षक आशुतोष शेखर ने कहा कि माओवादी हमले में मारे गये लोगों के परिजन को नौकरी मिलती है। उन्होंने कहा कि पीड़ित हमारा पूरा ध्यान है, हम परिवार की मदद करेंगे। इस परिवार के साथ हमारा संपर्क बना हुआ है।










