कालिकापुर में मनाई गई कवि गुरु रवींद्रनाथ की 162 वी जयंती कलिकापुर के उत्क्रमित उच्च विद्यालय शुरू किया गया बंगला भाषा शिक्षा का क्लास, सरकार से बांग्ला भाषा की पढाई शुरू करने की मांग

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कलिकापुर के उत्क्रमित उच्च विद्यालय प्रांगण में राधा गोविंद मंदिर सेवा समिति की ओर से कविगुरु,विश्व कवि,राष्ट्रीय संगीत के रचनाकार, भारत के प्रथम नोबेल पुरस्कार पानेवाले तथा शांति निकेतन के संस्थापक रवींद्रनाथ ठाकुर की 162 वी जयंती भक्ति और श्रद्धा के साथ मनाई गई। इस अबसर पर संम्मानीय अतिथि के रूप में कवि,लेखक,समाजसेवक तथा माताजी आश्रम के संचालक सुनील कुमार दे, पूर्व जिला परिषद सह कवि करुणामय मंडल,पंचायत समिति सदस्य  दीपक भकत,भक्त शिल्पी कमल कांति घोष, मूर्तिकार सह समाजसेवी सुबोध गोराई, रामगढ़ आश्रम के अध्यक्ष सुधांशु शेखर मिश्र,समाज सेवक सनत मंडल आदि उपस्थित थे।

सर्व प्रथम समिति की ओर से अतिथियों को माल्यार्पण कर के स्वागत किया गया। उसके बाद सुनील कुमार दे और दीपक भकत ने धूप दीप प्रज्वलित किया और कवि गुरु की प्रतिकृति पर माल्यार्पण किया। उसके बाद कमल कांति घोष ने रविंद्र संगीत प्रस्तुत कर के कार्यक्रम  का शुभारंभ किया और कवि गुरु की जीवनी पर प्रकाश डाला। सुनील कुमार दे ने उपस्थित सभी लोगों का  स्वागत करते हुए कहा रवींद्रनाथ ठाकुर केवल बंगाली का ही नहीं बल्कि पूरे भारत का गर्व है। बंगला में लिखी हुई गीतांजलि से उन्हें एशिया का पहला नोबल पुरस्कार मिला था। उन्ही की  लिखी हुई जन गण मन भारत का राष्ट्रीय गीत और आमार सोनार बंगला, बंगला देश का राष्ट्रीय गीत भी है। श्री दे ने आज के दिन में बंगला भाषा की पढ़ाई शुरू करने के लिए राधा गोविन्द मंदिर सेवा समिति की प्रशंसा  करते हुए धन्यवाद भी दिया। सुबोध गोराई ने कहा, झारखंड बनने के पहले झारखंड के प्रायः सभी स्कूल में बंगला भाषा की पढ़ाई होती थी लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि झारखंड बनने के बाद झारखंड में बंगला बुनियादी और सबसे अधिक लोगों की मातृभाषा बंगला होते हुए भी यहां बंगला भाषा की पढ़ाई बंद कर दी गई है। झारखंड में बंगला राजनीति का शिकार ही गया। फिर से झारखंड में बंगला भाषा की पढ़ाई होनी चाहिए यह सरकार से हमारा मांग है। सुधांशु मिश्रा ने कहा हम लोग बंगला मीडियम स्कूल में बंगला के अलावे हिंदी,अंग्रेजी  और संस्कृत भी पढ़े है। इसलिए झारखंड के सरकारी और गैर सरकारी स्कूल में जहाँ बांग्ला भाषी क्षेत्र है वहाँ हिंदी और अंग्रेजी  मीडियम स्कूल में भी बंगला भाषा का एक बिषय की पढ़ाई शुरू होनी चाहिए। क्यूंकि झारखंड में सबसे अधिक लोगो की मातृभाषा बंगला है।

करुणामय मंडल ने कलिकापुर में बंगला भाषा की पढ़ाई शुरू करने के लिए समिति को बधाई दी। उन्होंने इस अबसर पर रविंद्रनाथ ठाकुर के ऊपर रचित एक स्वरचित कविता भी पाठ किया। सनत मंडल ने भी बंगला भाषा सीखने  पर बल दिया। इस अबसर ममता पति ने रविंद्र संगीत और कविता पाठ कर के सुनाया l  इस अबसर पर बंगला सीखने  वाले सभी छात्र छात्राओं को माताजी आश्रम हाता और दीपक भकत की ओर से निशुल्क पुस्तक तथा करुणामय मंडल की ओर से कॉपी और कलम दिया गया। सभी छात्र छात्राओं को बंगला भाषा पढ़ने की इच्छा जताने के लिए धन्यवाद दिया गया। बंगला भाषा की पढ़ाई प्रति रविवार सुबह 8 बजे से 10 बजे तक होगी जो निशुल्क होगी जिसमें पूर्णेन्दु शेखर भकत,तारिणी सेन दास, विष्णु पद भकत और गणेश भकत क्लास लेंगे। अंत ने धन्यवाद ज्ञापन दीपक भकत ने किया तथा कार्यक्रम का संचालन तारिणी सेन दास ने किया। इस अबसर पर सुबल भकत,पूर्णेन्दु शेखर भकत,हाड़ीराम भकत,डॉक्टर बिकाश चंद्र भकत, अमल बिश्वास,बलराम गोप,मुनी राम बास्के,भीमसेन भकत,हिमाद्रि शेखर भकत,बंकिम बिहारी करण, तोड़ो महली, सरस्वती भकत,बन्दना कैबर्त,रमेश अग्निहोत्री, सुधांशु कुमार भकत,जोतिन भकत,सुमन सिन्हा के अलावे विद्यालय के छात्र छात्राएं काफी संख्या में उपस्थित थे।

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