पोटका प्रखण्ड में आदिवासी पारंपरिक चिकित्सक संघ के द्वारा शंकरदा पंचायत , लोवडीह गांव में एक बैठक का आयोजन (वैद्य) पीताम्बर हासदा की अध्यक्षता में किया गया। बैठक के दौरान सभी वैद्य के द्वारा अपने अनुभव को साझा किया गया। वनौषधि चिकित्सा पद्धति के संरक्षण के लिए सभी लोग मिलकर निर्णय लिए की हम लोग अपने घर पर हर्बल गार्डन व किचन गार्डन का निर्माण करेगे अन्य संबंधित व्यक्तियों को भी जागरूक करगे। और यह भी निर्णय लिया गया कि हम कोई भी जड़ी बूटी जंगल से लायेगे तो उसके बदले में पौधरोपण जरूर करेगे। पिरामल स्वास्थ्य के जिला समन्वयक नन्दलाल ने बताया कि जड़ी बूटी उपचार हमारी प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति है आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति जड़ी बूटियों के ज्ञान का विशाल भंडार है। लेकिन पारंपरिक चिकित्सकों को सहयोग की जरूरत है। जिससे वह अपने आजीविका के साथ-साथ इस परंपरा को भी आगे बढ़ाते रहें।
सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि हम लोगो के पास जो भी मरीज आएंगे उनका लेखा जोखा रखेगे। जिसमे एक रजिस्टर बनाएगे और जिसमे मरीज का महत्वपूर्ण जानकारी लिखेगे। अपने ज्ञान का आदान प्रदान किया गया। उसके बाद वन संरक्षण समिति के बारे में बात किया गया तो पता चला की अभी ये समिति एक्टिव नहीं है । साथ ही रेफरल लिंकेज के बारे में बात की गई तो सभी वैद्य ने सहमति बनाई की यदि हमारे आस पास या मेरे पास कोई बीमार पड़ता है या कोई जटिल केस हमारे पास आता है जिसका इलाज हम नही कर सकते उसको हम सी एच् सी पर रेफर करे तो उसका इलाज सही से हो सके जिससे हमारा समुदाय, पास पड़ोस व गांव के लोग स्वास्थ्य रहे। बैठक में आमंत्रित सदस्य के रूप में नन्द लाल जिला कार्यक्रम समन्वयक पिरामल स्वास्थ्य पीताम्बर हासदा, वैसनव सरदार, अमर सोरेन, हरीलाल हासदा, मनकी टुडु, नर्मल टुडु , आदान सोरेन, बीनय सरदार आदि उपस्थित रहे।










