मुसाबनी प्रखंड अंतर्गत रोआम में पहाड़ की ऊँचाइयों पर अवस्थित प्राचीन श्री श्री सिद्धेश्वर महादेव मंदिर को अंतत: वनाधिकार का पट्टा प्राप्त हो गया . इसके साथ ही मंदिर को लेकर होने वाले विवाद का भी सदा के लिए समापन हो गया . ज्ञात हो करीब 70 वर्ष पहले महान संत बाबा विनय दास जी ने इस स्थान पर इस शिव मंदिर की स्थापन कर विधिवत पूजा अर्चना शुरू की थी. धीरे -धीरे लोगों ने यहाँ आना शुरू किया और इसके साथ ही इस मंदिर के प्रति लोगों की मान्यताएं भी प्रगाढ़ होती चली गयी. और पहाड़ की चोटी पर स्थित यह शिव मंदिर सिद्धेश्वर धाम बन गया. आज देश भर से सावन के महीने में लोग इस मंदिर में बाबा का जलाभिषेक करने आते हैं. सावन के महीने में यहाँ पैर रखने की जगह नहीं होती. एक और जहाँ लोग बाबा भोलेनाथ के दर्शन को आते हैं वहीँ संत बाबा विनय दास जी के अनुयायी और शिष्य भी भारी तादाद में यहाँ जुटते हैं.
इस मंदिर पर अधिपत्य को लेकर कुछ वर्ष पहले एक गुट द्वारा विवाद उत्पन्न किया गया था. जिसके बाद मंदिर कमिटी के लोगों ने ग्राम वासियों की सहमती से वन अधिकार समिति के माध्यम से वन विभाग को वर्ष 2020 में मंदिर की जगह के लिए पट्टा निर्गत करने का आवेदन दिया था. मगर पूर्व के किसी भी अधिकारी या जनप्रतिनिधि ने इस ओर ध्यान नहीं दिया और वन भूमि के पट्टे का आवेदन अनुमंडल स्तरीय वन अधिकार समिति के कार्यालय में लंबित पड़ा अपनी बारी का इंतज़ार करता रहा. इस दौरान स्थानीय भाजपा नेता रामदेव हेम्ब्रम मुसाबनी प्रखंड प्रमुख के पद पर काबिज हुए और इसी के साथ वो अनुमंडल स्तरीय वन अधिकार समिति के अध्यक्ष भी बने. इसके बाद उन्होंने प्रमुखता के आधार पर सिद्धेश्वर धाम के लिए वन अधिकार पट्टा की लंबित पड़ी संचिका को आगे बढाया और इसी के साथ जिला पार्षद देवयानी मुर्मू और जिला परिषद् अध्यक्ष बारी मुर्मू के सामने इस बात को रखा जिसके बाद सभी के संयुक्त प्रयासों से सिद्धेश्वर धाम मंदिर को वन अधिकार पट्टा निर्गत कर दिया गया. और इसी के साथ मंदिर वन विभाग के रिकॉर्ड में अंकित हो गया. घाटशिला के विधायक रामदास सोरेन तथा उप- विकास आयुक्त ने मुसाबनी प्रखंड में आयोजित समारोह में मंदिर कमिटी के सदस्यों तथा इस अभियान में शामिल लोगों को मंदिर का वन अधिकार पट्टा सौंपा.

मुसाबनी प्रखंड प्रमुख सह वन अधिकार समिति के घाटशिला अनुमंडल अध्यक्ष रामदेव हेम्ब्रम ने बताया की इस कार्य में पूरी मंदिर कमिटी लगी रही जिसके फलस्वरूप आज यह कामयाबी मिली है. उन्होंने कहा की इस कार्य के लिए मंदिर कमिटी के सनातन सीट,दीनबंधु महतो, नायक बाबा, नारायण चटर्जी,रोआम के ग्राम प्रधान मनोरंजन महतो ,कुमीरमुड़ी के ग्राम प्रधान सीताराम किस्कू केन्द्रीय शांति समिति की सदस्य समाजसेवी राधा चटर्जी का अहम् योगदान रहा है .










