बागबेड़ा ग्रामीण जलापूर्ति योजना के तहत किए जा रहे आधा अधूरा बचे निर्माण कार्य के निरिक्षण लिए बागबेड़ा महानगर विकास समिति के अध्यक्ष सुबोध झा के नेतृत्व में आन्दोलनकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल बागबेड़ा के बड़ौदा घाट निर्माण स्थल पर पहुंचा । निरिक्षण के क्रम में सभी लोगों ने यह पाया की बागबेड़ा के बड़ौदा घाट में 22 पिलरों का निर्माण होना था । जिसमे से मात्र 14 पिलरों का ही निर्माण हुआ और काम की गुणवत्ता खराब रहने के कारण एक पिलर काम में आने से पहले ही ही नदी में गिर गया । योजनाएं टाय टाय फिश हो गई 237 करोड़ रुपयों का बंदरबांट हो गया और पेयजल की आस में जनता को बूँद – बूँद पानी के लिए तरसती रही ।
पुनः इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए आंदोलन के बाद सरकार द्वारा पुनः 50 करोड़ 58 लाख रुपए से इस योजना को पूरा करने के लिए स्वीकृति प्रदान किया गया है। समिति के सदस्यों ने बताया की निरिक्षण का मुख्य उद्देश्य यह है की पूर्व की तरह इस बार भी कहीं 50 करोड़ 58 लाख रुपए का बंदरबांट ना हो जाये इसलिए समिति के सदस्यों द्वारा बागबेड़ा ग्रामीण जलापूर्ति योजना के तहत बचे हुए कार्य की निगरानी की जा रही है।। जिससे समय पर ये योजना पूर्ण हो और जनता को इसका लाभ मिल सके इस निरक्षण टीम में सुबोध झा के साथ समिति के रितु सिंह , विनय सिंह कृष्णा चन्द्र पात्रो शामिल थे।










