सरायकेला: कोरोनाकाल के दौरान सरायकेला-खरसावां जिले के वरिष्ठ पत्रकार बसंत साहू के ऊपर चौका थाने में हुए झूठा मामले को झारखण्ड उच्च न्यायालय ने निरस्त कर दिया. इस मामले में बसंत साहू को डीसी के बयान का ऑडियो वायरल करने पर सरकारी कार्य में बाधा डालने का मामला दर्ज किया गया था. बसंत साहू के जेल जाने पर राज्य में पत्रकारों ने काला बिल्ला लगाकर विरोध जताया था जिसके बाद सरायकेला कोर्ट से पांचवें दिन ही बसंत साहू को जमानत मिल गई थी.इस मामले में कोर्ट का फैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य के विभिन्न ज़िलों में पत्रकारों पर फर्जी मामले अवैध धंधों और घोटालों के पर्दाफाश पर खबर चलने के कारण हो रहे हैं.
इस पर बसंत साहू का कहना है कि आज राज्य के पत्रकारों की जीत हुई है और मैं इस मामले पर न्यायालय में कड़ी कानूनी कारवाई करने की तैयारी कर रहा हूं. एक लोक्सेबक के रूप में सरकारी पदाधिकारियों को जो अधिकार संविधान द्वारा दिए गए हैं उसका दुरूपयोग करके एक श्रमजीवी पत्रकार को जिस तरह से इन पदाधिकारियों ने षड्यंत्र रचकर सामाजिक हत्या करने का प्रयास किया था. इसका जवाब अब इन्हें अदालत में देना होगा. उन्होंने कहा विधि विशेषज्ञों से राय ली जा रही है जल्द ही सभी पदाधिकारियों पर कानूनी करवाई की जायगी.
ऑल इंडिया स्मॉल एंड मीडियम जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय महासचिव प्रीतम सिंह भाटिया ने कहा है कि एक और बसंत साहू जैसे मान्यता प्राप्त पत्रकार को डीसी सम्मानित करते हैं तो दूसरी तरफ उसे साजिश रच कर वही डीसी जेल भिजवाते हैं. उन्होंने कहा कि उस समय भी डीसी को दलाल किस्म के पत्रकारों ने ही गुमराह किया था. श्री भाटिया ने कहा कि राज्य में 5-7 मामले ऐसे भी है जिसमें पत्रकारों पर दर्ज फर्जी मामले न सिर्फ रद्द हुए हैं बल्कि शिकायकर्ताओं को न्यायालय से फटकार भी लगाई गई है. उन्होंने कहा की ऐसे फर्जी मामलों पर रोक लगाने के लिए जल्द ही राज्य के मुख्यमंत्री और देश के गृह मंत्री को एक ज्ञापन देकर एक आयोग के गठन की मांग की जायगी. ताकि पत्रकारों पर दर्ज फर्जी मामलो की निष्पक्ष जांच हो और ऐसे षड्यंत्र रचने वाले दलाल और असमाजिक तत्वों को जेल भेजा जा सके .
इस मौके पर पश्चिम सिंहभूम जिले के पूर्व महासचिव सुजीत साहू ने कहा कि यह फैसला फर्जी मामले दर्ज करवाने वाले हर शिकायतकर्ता और पूर्वाग्रह से ग्रसित अधिकारियों के लिए सबक भी है.










